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जब आप आप औऱ मैं मैं नहीं रहता
जब क्षितिज पर भोर का संकेत होने लगे, पक्षी जब अपने नीड़ पर कुलबुलाने लगे । जब ओस की बूंदें बादलों और हवा से विलग होने को आतुर जान पढें, पात पात जब उस ओस को अपने अपने अंग पर धरने को हों ख़ड़े । तब मेरे मानस पटल पर आप छाने लगते हैं ।। जब भवरों का गान और पंछी समुह का तान, जब कोयल की कूक हृदय में उठाये इक मधुर हूक । तब मेरी तन्द्रा में आप आने लगते हैं ।। जब सूर्य की पहली किरण आँखों के पट धीरे से है खोले, मलयज़ पवन कानों में प्यार से है कुछ बोले । मस्ती में लतिकायें अल्हड़ सी हैं यूँ डोले, और जब प्रेम का ज्वर चढ़ने लगे होले होले । तब आप मुझे दीवाना बनाने लगते हैं । जब रवि से आँख मिलाये न बने, जब शांत पेड़ हैं प्रहरी से तने । और गर्मी व पसीने में बार बार जो ठने, निढाल से भाव हो उठें अनमने ।। तब ओढ़नी सा आप और आपका साथ विश्राम दिलाने लगते हैं।। फिसलता जा रहा है धीरे धीरे से दिन, ओढ़ रही है शाम तारों की चादर गिन गिन। जब थमने लग जाय दिन भर का धमाल, और कोई भी रह न पाये जब पी के बिन । तब मद्धिम ...


Excellent
ReplyDeleteVery nice
Deleteदिल को छू लेने वाली कविता
DeleteThanks a lot for the comments. I really am moved by these
DeleteBahut sundar kavita
ReplyDeleteबहुत शुक्रिया
DeletePlease know that you have such talent and your words not only touch me, but so many here--keep writing, expressing and touching our souls.
ReplyDeleteP Chowdhury
Dear Priyatosh
DeleteThe comments have given me a sense of purpose.
If I can touch souls of such lovely people then I have really arrived where I wanted to be.
Thanks again